टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया

क्या है टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया, जानिये IVF ट्रीटमेंट सरल शब्दों में

जो दंपत्ति बच्चा ना होने की वजह से परेशान है उनके लिए IVF या टेस्ट ट्यूब बेबी का रास्ता एक बड़ी उम्मीद है क्यूंकि आजकल ये सबसे आसान और सफल रास्ता है बच्चा पाने का. ऐसे सभी लोग जो IVF treatment करवाना चाहते है उनका हमेशा ये सवाल रहता है कि क्या है टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया या टेस्ट ट्यूब के ज़रिये बच्चा कैसे पैदा होता है.

इसलिए हम आपके लिए ख़ास लाये है ये पोस्ट जिसे पढ़ कर आप जान पायेंगे IVF treatment या test tube बेबी तकनीक.

टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया के मुख्यता 3 चरण होते:टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया

IVF Process in Hindi का पहला चरण: पहले चरण में अंडाशयी पुटक (follicles) को बनाने के लिए Follicle Stimulating Hormone नामक इंजेक्शन लगाए जाते है. ये इंजेक्शन हर रोज़ एक लगाया जाता है ताकि गर्भ में अंडे बनाए जा सके. ये इंजेक्शन 8 se 10 दिन तक लगातार लगते है (1 इंजेक्शन हर रोज).

IVF Procedure in Hindi का दूसरा चरण: टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया के दुसरे चरण में follicles में बने अन्डो को बाहर निकाला जाता है जिसे कि Egg Pick up भी कहते है. इसमें कोई ऑपरेशन नहीं होता, केवल 15 मिनट की इस प्रक्रिया में कोई दर्द भी नहीं होता. अंडे निकालने के बाद इन्हें फ्रीज़ कर के रखा जाता है.

गर्भावस्था के दौरान सावधानियां

IVF Process in Hindi का तीसरा चरण: तीसरा चरण है अंडे को गर्भ यानि अंडाशय में डालने का. इस चरण में अंडे को एक बहुत ही पतली नली द्वारा गर्भ में छोड़ा जाता है. अंडे को गर्भ में छोड़ने के बाद डॉक्टर Progesterone नाम की एक दवाई देते है या फिर कई बार इसके इंजेक्शन भी लगाये जाते है. ये दवाई इसलिए दी जाती है ताकि गर्भ में डाला अंडे को नुक्सान ना हो और औरत जल्द से जल्द गर्भ धारण कर ले.

ये थे टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया के तीनो चरण, इसके बाद औरत अपने ही गर्भ में बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार हो जाती है.

क्या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रोक्रिया में दर्द भी होता है? 

ज़्यादातर लोग जो टेस्ट ट्यूब बेबी करवाना चाहते है, उनका यही प्रश्न होता है कि test tube baby process में कितना दर्द होता है. आपको बताना चाहेंगे कि इस पूरी प्रक्रिया में औरत को किसी प्रकार का कोई दर्द नहीं होता. इस प्रक्रिया में जो इंजेक्शन लगते है उनमे भी सिर्फ चींटी काटने जितना दर्द होता है और ये इंजेक्शन औरते अपने आप भी लगा सकती है. चूँकि डॉक्टर और दंपत्ति कोई रिस्क नहीं लेना चाहते, इसलिए वे क्लिनिक या हॉस्पिटल में आकर ही ये इंजेक्शन लगवाना पसंद करते है.

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